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संग्रह प्रविष्टि:
9788173152702 - MANU SHARMA: RAJSOOYA YAJNA (KRISHNA KI ATMAKATHA-VI) - पुस्तक

MANU SHARMA (?):

RAJSOOYA YAJNA (KRISHNA KI ATMAKATHA-VI) (?)

डिलीवरी से: भारतनई किताब
ISBN:

9788173152702 (?) या 8173152705

, अज्ञात भाषा, नई
शिपिंग लागत के लिए: IND
Hard Bound . New. Year of publication 8173152705
डेटा से 06.03.2017 01:00h
ISBN (वैकल्पिक notations): 81-7315-270-5, 978-81-7315-270-2
9788173152702 - Manu Sharma: Rajsooya Yajna (Krishna Ki Atmakatha-Vi) - पुस्तक

Manu Sharma (?):

Rajsooya Yajna (Krishna Ki Atmakatha-Vi) (2009) (?)

डिलीवरी से: भारतपुस्तक अंग्रेजी भाषा में हैयह पुस्तक एक hardcover पुस्तक एक पुस्तिका नहीं हैनई किताबइस पुस्तक के प्रथम संस्करण
ISBN:

9788173152702 (?) या 8173152705

, अंग्रेजी में, 310 पृष्ठ, Prabhat Prakashan, hardcover, नई, प्रथम संस्करण
253 + शिपिंग: 80 = 333(दायित्व के बिना)
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विक्रेता/Antiquarian से, GAURAV BOOKS CENTER
मेरी मनुजात की वास्‍तविकता पर जब चमत्कारों का कुहासा छा जाता है तब लोग मुझमें ईश्‍वरत्व की तलाश में लग जाता हूँ। शिशुपाल वध के समय भी मेरी मानसिकता कुछ ऐसे ही भ्रम में पड़ गई थी; पर ज उसके रक्‍त के प्रवाह में मुझे अपना ही रक्‍त दिखाई पड़ा तब मेरी यह मानसिकता धुल चुकी थी। उसका अहं अदृश्‍य हो चुका था। मेरा वह साहस छूट चुका था कि मैं यह कहूँ कि मैंने इसे मारा है। अब मैं कहता हूँ कि वह मेरे द्वारा मारा गया है। मारनेवाला तो कोई और था। वस्तुत: उसके कर्मों ने ही उसे मारा। वह अपने शापों से मारा गया। संसार में सारे शापों से मुक्‍त होने का कोइ्र-न-कोई प्रायश्‍च‌ि‍‍त्त है; पर जब अपने कर्म ही शापित करते हैं तब उसका कोई प्रायश्‍च‌ि‍त्त नहीं।, hardcover, संस्करण: 1st, लेबल: Prabhat Prakashan, Prabhat Prakashan, उत्पाद समूह: Book, प्रकाशित: 2009, स्टूडियो: Prabhat Prakashan, बिक्री रैंक: 173474
मंच क्रम संख्या Amazon.in: 7sYYBf6o5uGREo1FK7a8122Wy8IcfXKRuGu5KLaPNq5O2pPS7gtAUGzNuQRgivOzqOJxW8GKeJngz8ZVoBrQPQAXQJkOMQugZ11gzaUpBjippfvuSL7lwxn9jxdDEPqJLy8vvsM5xY1sBv1k6Z7eXetUlW1YymmZ
कीवर्ड: Books, Reference
डेटा से 06.03.2017 01:00h
ISBN (वैकल्पिक notations): 81-7315-270-5, 978-81-7315-270-2

9788173152702

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